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भविष्य से खिलवाड़ करने वाले शिक्षक बेनकाब

Screenshot 2025 09 27 114118 चित्रसेन घृतलहरे, वन्दे भारत/समृद्ध भारत 27 सितम्बर 2025/सारंगढ़-बिलाईगढ़//जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने विद्यालयों के आकस्मिक निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों व कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। निरीक्षण में ड्यूटी से गायब मिले शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि तीन दिन में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।

जमगहन स्कूल का मामला:
22 सितम्बर 2025 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जमगहन के निरीक्षण में व्याख्याता संगीता श्रीवास और प्रतिभा पटेल ड्यूटी से अनुपस्थित पाई गईं। इसे गंभीर अनुशासनहीनता और सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन मानते हुए दोनों शिक्षिकाओं को तलब किया गया है।

भटगांव कन्या विद्यालय में सबसे अधिक अनुपस्थिति:
11 सितम्बर 2025 को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भटगांव का नजारा और भी चौंकाने वाला मिला। निरीक्षण के दौरान प्रभारी प्राचार्य एम.एल. अमलीपार सहित व्याख्याता वाई.के. पड़वार, एन. केशरवानी, टी.पी. भारद्वाज, जी.आर. पटेल, आर.के. साव, विजय कुमार देवांगन, व्यायाम शिक्षक सीमा ठाकुर, सहायक शिक्षक आर.के. नारंग, कमलेश्वरी साहू, लता सिदार, भृत्य सीमा रजक और व्यावसायिक प्रशिक्षक भूपेन्द्र साहू अनुपस्थित पाए गए।
इसी स्कूल में रजिस्टर जांच के दौरान व्याख्याता मोईन मोहम्मद, एल.एन. साहू, सहायक शिक्षक राकेश जांगड़, एस. उपाध्याय, नरेन्द्र पटेल, भूत्य रामायण बाई चौहान, झुमरू बाचाड़ एवं प्रशिक्षक डी. पटेल के कई दिनों से हस्ताक्षर भी नहीं पाए गए।

शिक्षा अधिकारी का सख्त रुख:
DEO कार्यालय ने इसे “लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का स्पष्ट उदाहरण” बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर समझौता नहीं किया जाएगा। सभी को व्यक्तिगत रूप से हाज़िर होकर जवाब देने का आदेश जारी किया गया है। स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर एकपक्षीय कार्यवाही होगी।

जनता की नाराज़गी:
स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 80-90 हजार रुपये वेतन पाने वाले सरकारी शिक्षक अपने कर्तव्य से लापरवाह हैं, जबकि निजी स्कूलों में 5-7 हजार रुपये वेतन पर भी शिक्षक अनुशासन से पढ़ाते हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार शिक्षकों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो ताकि शिक्षा व्यवस्था सुधरे।

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